Wednesday, February 27, 2019

जैश-ए-मोहम्मद का दावा, युसूफ़ अज़हर सहित कोई मौत नहीं

भारत का कहना है कि उसकी वायुसेना ने नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है.

भारतीय लड़ाकू विमानों के नियंत्रण रेखा को पार किया, इसकी सूचना पहले पाकिस्तान ने ही दी.

पाकिस्तानी आर्मी के प्रवक्ता आसिफ़ गफ़ूर ने ट्वीट कर कहा कि भारत के लड़ाकू विमान मुज़फ़्फ़राबाद सेक्टर के भीतर तीन से चार किलोमीटर भीतर घुस आए थे लेकिन पाकिस्तान के तत्काल जवाबी कार्रवाई के बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा.

भारत का दावा है कि उसके हमले में जैश- ए- मोहम्मद के तीन सौ चरमपंथी मारे गए.

भारतीय मीडिया में दावा किया जा रहा है कि मारे गए चरमपंथियों में जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अज़हर के बहनोई शामिल हैं.

लेकिन जैश-ए-मोहम्मद के सूत्रों ने बताया कि बालाकोट में जब भारतीय लड़ाकू विमान मिराज ने हमला किया उस वक्त यूसुफ़ अज़हर वहां मौजूद नहीं थे.

यूसुफ अज़हर जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मौलाना मसूद अज़हर के बहनोई हैं. जैश-ए-मोहम्मद के चरमपंथियों के बीच वे गौरी भाई के नाम से भी मशहूर हैं.

40 साल के अज़हर की शादी मसूद अज़हर की छोटी बहन से हुई है. मसूद अज़हर की तरह युसूफ अज़हर, पंजाब प्रांत के बहावलपुर के ही हैं.

युसूफ़ अज़हर जैश-ए-मोहम्मद के सक्रिय सदस्य हैं और चरमपंथी संगठन की विचारधारा और लक्ष्य के प्रति उनकी निष्ठा रही है.

युसूफ़ अज़हर उनका कोड नाम है और इस नाम के से उनकी मसूद अज़हर से निकटता ज़ाहिर होती है. उनका वास्तविक नाम लोगों को पता नहीं है.

इन सूत्रों ने ये भी दावा किया है कि युसूफ़ अज़हर पूरी तरह सुरक्षित हैं. इन लोगों के मुताबिक हमले में जैश-ए-मोहम्मद का कोई चरमपंथी हताहत नहीं हुआ है. इन लोगों के दावों पर यक़ीन करें तो इस इलाक़े में इन दिनों कोई ट्रेनिंग कैंप काम नहीं कर रहा है.

भारतीय विध्वंसक विमानों ने जिस जगह हमला किया है, उसे जाबा कहते है. यह मानशेरा शहर और बालाकोट के बीच स्थित है. जाबा अपने भेड़ पालन उद्योग के लिए मशहूर है. यह एक बड़ा सा गांव है. इसलिए हमले के बाद गांव वाले उस जगह पहुंच गए जहां भारतीय विमानों ने पेलोड गिराए थे.

इन ग्रामीणों को हमले की जगह पर ना तो किसी का शव मिला और ना ही कोई घायल ही मिला. ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक एक मकान जरूर क्षतिग्रस्त हुआ है लेकिन वहां भी कोई घायल नहीं मिला.

जाबा बटरासी के नज़दीक है, बटरासी के वन्य क्षेत्र में पाकिस्तान का स्काउट कैडेट कॉलेज स्थित है, लेकिन उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.

जाबा और मानशेरा पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से सटा हुआ इलाका है. यहां से सीधी सड़क पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुजफ़्फराबाद तक जाती है. ये वही इलाका है जो अक्टूबर, 2005 के भूकंप से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ था.

मानशेरा पाकिस्तान के ख़ैबरपख़्तूनख़्वाह प्रांत में है और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से बाहर है. इससे ये भी साफ़ है कि भारतीय लड़ाकू विमानों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के दायरे को पार किया है, ना कि लाइन ऑफ़ कंट्रोल को पार किया है.

भारतीय विमान चाकोटी बॉर्डर के इलाके से लाइन ऑफ़ कंट्रोल के साथ आए और मानशेरा के बालाकोट की तरफ़ बढ़ गए. मानशेरा से सटा हुआ ख़ैबरपख़्तूनख़्वाह का एक और शहर है एबाटाबाद.

पुलवामा हमले से भी इनकार
जैश-ए-मोहम्मद के सूत्रों ने ये भी बताया है कि वे जब भी कोई हमला करते हैं तो उसकी ज़िम्मेदारी लेते रहे हैं चाहे वो हमला भारत प्रशासित कश्मीर में ही क्यों ना किया गया हो. लेकिन संगठन के सूत्रों के मुताबिक इस बार पुलवामा में हुए हमले की ज़िम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने नहीं ली है.

इन सूत्रों के मुताबिक पुलवामा हमले के आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार ने जो अपना पहले से रिकॉर्डेड वीडियो मैसेज जारी किया था उसमें उसने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की बात कही थी.

जैश-ए-मोहम्मद के सूत्रों के मुताबिक वो लोग आदिल डार को नहीं जानते हैं और उसके वीडियो के दावे से वो लोग खुद सकते में आ गए थे.

जैश-ए-मोहम्मद के सूत्रों ने भारत के हवाई हमले में कैंपों को नष्ट करने के दावे किए जा रहे हैं वो भारत का ही प्रोपगैंडा है क्योंकि इलाके में ऐसा कोई कैंप स्थित नहीं है.

हालांकि पाकिस्तान ने, पंजाब प्रांत की सरकार जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी मस्जिद सुभानअल्लाह और जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपूर स्थित मुख्यालय मरकज़ उस्मान अली को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

पुलिस ने इन दोनों जगहों पर चलने वाले दो मदरसों को भी सील कर दिया है. इनमें एक मदरसा जूनियर स्कूली छात्रों के लिए है जबकि दूसरा मदरसा सीनियर छात्रों के लिए है.

Wednesday, February 20, 2019

पुलवामा: हमले के बाद कांग्रेस सकते में, बीजेपी जोश में क्यों?- ब्लॉग

ग्यारह फ़रवरी को कांग्रेस की पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी रोड शो कर रही थीं, राहुल गांधी हाथ में खिलौना लड़ाकू विमान लेकर जनता को मुद्दे की याद दिला रहे थे, कुछ लोग कह रहे थे कि 'हवा बदल रही है, बीजेपी दबाव में दिख रही है'.

इसके तीन दिन बाद 14 फ़रवरी को पुलवामा के हमले से पूरा देश सकते में आ गया, प्रियंका गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस यह कहते हुए रद्द कर दी कि 'ऐसे मौक़े पर राजनीति की बात करना ठीक नहीं है.'

हमले के बाद पूरा देश जिस तरह के सदमे में डूब गया, उससे कांग्रेस पार्टी शायद अभी तक नहीं उबर पाई है, जबकि बीजेपी पूरे जोश के साथ जल्दी ही चुनावी रंग में आ गई.

पुलवामा के हमले के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले में "सरकार के साथ है". यह सवाल कि इस हमले को रोकने की ज़िम्मेदारी किसकी थी? और इस हमले की टाइमिंग की बात करने की हिम्मत राहुल गांधी नहीं दिखा पाए, यह पहल करके ममता बनर्जी ने एक बार फिर बीजेपी-विरोधी गठबंधन का नेतृत्व हथिया लिया है.

अगर आप 14 फ़रवरी के बाद की राजनीतिक हलचलों को देखें तो आपको साफ़ दिखेगा बीजेपी पूरी सक्रियता के साथ चुनावी अभियान चला रही है जबकि कांग्रेस का पिछले हफ़्ते वाला जोश काफ़ूर है. कांग्रेस शायद रुककर देखना चाहती है कि पुलवामा कांड कैसे आगे बढ़ेगा, उसे यह भी दिख रहा है कि इस हमले के बाद लोगों में बहुत गुस्सा है जिसे अपने पक्ष में मोड़ने की कोई तरकीब उसे नहीं दिख रही है.

दूसरी ओर, बीजेपी बड़ी सहजता से देशभक्ति, सेना, राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, मोदी, वंदे मातरम, भारत माता की जय जैसे पुराने नारों पर लौट आई है. रोज़गार, विकास, राफ़ेल की बात अभी कोई सुनने को तैयार नहीं दिख रहा, ऐसे में कांग्रेस के पास बीजेपी के सुर में सुर मिलाने या चुप रहने के अलावा इस वक्त कोई और चारा भी नहीं है.

पंजाब में कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सिर्फ़ इतना कहा था कि "आतंकवाद का कोई देश, मज़हब, ज़ात नहीं होता." इस पर उन्हें तीखे हमलों का सामना करना पड़ा है, उन्हें अकेले ही अपना बचाव करना पड़ा है, कांग्रेस का कोई नेता उनके बचाव में नहीं आया कि उन्होंने कोई ग़लत बात नहीं कही है.

गठबंधन, रैली और भाषण

मंगलवार को तमिलनाडु में बीजेपी और एआईडीएमके के गठबंधन का ऐलान किया गया, पलानीस्वामी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता पीयूष गोयल ने प्रेस को संबोधित किया. तमिलनाडु में बीजेपी पांच लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

इससे पहले सोमवार को बीजेपी-शिव सेना ने काफ़ी तनातनी और रूठने-मनाने के खेल के बाद, गठबंधन में चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. एक-दूसरे को पटकने और मुंह तोड़ने की धमकी देने वाले नेताओं ने एक-दूसरे का हाथ थामकर मुस्कुराते हुए फ़ोटो खिंचाए. महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 25 और शिव सेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

अमित शाह और पीयूष गोयल जहां पूरी सक्रियता के साथ राजनीतिक गतिविधियों में जुटे दिखे, वहीं प्रियंका गांधी और राहुल गांधी, अखिलेश, मायावती या दूसरे विपक्षी नेता भी चुप बैठे ही नज़र आ रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी उत्तर प्रदेश में झांसी में, महाराष्ट्र में धुले में और बिहार में बरौनी में जनसभाओं को संबोधित कर चुके हैं और 'वंदे भारत' सहित कई परियोजनाओं का उदघाटन और शिलान्यास भी किया है. पुलवामा पर राजनीति न करने की बात करने वाली बीजेपी के वरिष्ठ नेता और रेल मंत्री ने कहा कि यह ट्रेन "आतंकवादियों को जवाब है." इसी तरह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने असम में चुनावी सभा को संबोधित किया, पुलवामा हमले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "यह यूपीए की सरकार नहीं है."

चुनावी सभाओं का सिलसिला जारी रखते हुए बुधवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ओड़िसा के पिछड़े ज़िले कालाहांडी में 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ सिंह गर्जना' करेंगे.

जिस शाम पुलवामा से मरने वाले सैनिकों की बढ़ती तादाद की ख़बर आ रही थी, उस शाम दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी प्रयागराज में बीजेपी के लिए न सिर्फ़ वोट माँग रहे थे बल्कि संगीत का कार्यक्रम भी कर रहे थे, जिसके लिए उनकी आलोचना हुई है.

राहुल गांधी ने पुलवामा के हमले के बाद छत्तीसगढ़ में एक जनसभा को संबोधित किया और बीजेपी छोड़कर आए कीर्ति आज़ाद का पार्टी में स्वागत किया, इसके अलावा राजनीतिक तौर पर वे चुप्पी साधे हुए दिख रहे हैं. प्रियंका गांधी पुलवामा की घटना के बाद लोगों से मिल-जुल तो रही हैं लेकिन उन्होंने मंच से या प्रेस से कुछ कहने का जोखिम नहीं लिया.

14 फ़रवरी से पहले तक बीजेपी विपक्ष को हमलों पर पटलवार करते हुए विकास की बात कर रही थी, विश्व हिंदू परिषद और संघ ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि राम मंदिर पर चुनाव हो जाने तक कोई आंदोलन नहीं होगा.

पांच दिन पहले तक लग रहा था कि 2019 के आम चुनाव का एजेंडा सेट करने की पहल विपक्ष ने ले ली है, लेकिन पुलवामा हमले के बाद बीजेपी आक्रामक तेवर दिखा रही है क्योंकि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ देशभक्ति की बातें करने का उसका ट्रैक रिकॉर्ड काफ़ी अच्छा है, पार्टी देशभक्ति को हिंदुत्व का पर्यायवाची शब्द बनाने में कामयाब हो गई है. दूसरी तरफ़, पाकिस्तान, मुसलमान, कश्मीरी, देशद्रोही वगैरह भी ज़रूरत के हिसाब से आसानी से बदलकर इस्तेमाल किए रहे हैं.

Sunday, January 27, 2019

भारत रत्न प्रणब मुखर्जी बीजेपी के कितने काम आएँगे? : ब्लॉग

प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न देकर बीजेपी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं. यह चर्चा प्रणब मुखर्जी की योग्यता के बारे में नहीं है, बल्कि चुनावी साल में बड़े प्रतीकात्मक फ़ैसले के ज़रिए दिए जाने वाले संदेश के बारे में है.

भारत रत्न और पद्म पुरस्कार हमेशा से ही राजनीतिक रहे हैं, इतने राजनीतिक रहे हैं कि 1988 में चुनाव से ठीक पहले तमिलनाडु के वोटरों को रिझाने के लिए उस वक़्त की राजीव गांधी सरकार ने एमजी रामचंद्रन को भारत रत्न दे दिया था, जिसकी खासी आलोचना हुई थी.

बहरहाल, 1984 और 2004 में योग्य माने जाने के बावजूद प्रधानमंत्री बनने से चूक गए, या गांधी परिवार के विश्वासपात्र न होने की वजह से किनारे कर दिए गए प्रणब मुखर्जी को बीजेपी ने कांग्रेस की परिवार केंद्रित राजनीति के शिकार के रूप में पेश किया है.

बीजेपी का कथानक ये है कि कांग्रेस ने एक ख़ास परिवार से बाहर के लोगों को वह जगह नहीं दी, जिसके वे हकदार थे. सरदार पटेल, शास्त्री, नरसिंह राव से लेकर प्रणब मुखर्जी तक. प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न देकर बीजेपी ने इसी स्क्रिप्ट को और दमदार बनाया है.

वैसे कांग्रेस की विचारधारा का प्रमुख चेहरा रहे प्रणब मुखर्जी को पार्टी से अलग एक विशेष पहचान देने की कोशिश पिछले साल भी दिखी थी जब उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या आरएसएस के एक आयोजन में मुख्य अतिथि बनाया गया था. तब इसे लेकर काफ़ी बहस हुई थी और प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी तक ने अपने पिता के फ़ैसले पर सवाल उठाया था.

बहरहाल प्रणब मुखर्जी ने 7 जून 2018 को नागपुर में आरएसएस मुख्यालय में भाषण दिया और उसमें उन्होंने राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति को लेकर जो कुछ कहा, उसने ये स्पष्ट कर दिया कि मंच भले ही अलग हो, उनकी सोच में कोई भी फ़र्क़ नहीं आया है.

पिछले साल की उस घटना के बाद अब नए साल में प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न देने का फ़ैसला फिर एक बार उन्हें गांधी परिवार की धुरी पर टिकी कांग्रेस से अलग पहचान देने की क़वायद लगती है.

लेकिन बात इतनी ही नहीं है, पश्चिम बंगाल में पैर जमाने के लिए ज़ोरदार संघर्ष कर रही बीजेपी बंगाली अस्मिता का सम्मान करती हुई भी दिखना चाहती है.

बीजेपी चुनाव प्रचार में खुलकर कहेगी कि कांग्रेस पर जिस परिवार का कब्ज़ा है उसने बंगाल के सपूत को दो बार प्रधानमंत्री बनने से रोका, हमने विरोधी पार्टी का होने के बावजूद उसे सर्वोच्च सम्मान दिया. बंगाल से बीजेपी को बहुत उम्मीद है.

उसे लगता है कि उत्तर भारत और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में होने वाले संभावित नुक़सान की भरपाई बंगाल से हो सकती है.

कुल मिलाकर ये कि कांग्रेस की फ़ैमिली नंबर वन को ओछा दिखाते हुए 'मोरल हाई ग्राउंड' लेना, बंगाल में उसका राजनीतिक लाभ उठाना और यह भी कहना कि बीजेपी देश के सभी सपूतों का सम्मान करती है जबकि कांग्रेस सिर्फ़ एक ख़ास परिवार के लोगों का.

बीजेपी ने भारत रत्न वाली श्रेणी में प्रणब मुखर्जी को डालकर उन्हें भारत रत्न पाने वाले कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों के बराबर खड़ा कर दिया है जिनमें इंदिरा गांधी और राजीव गांधी शामिल हैं, इस तरह भारत के राजनीतिक इतिहास में उन्हें सोनिया गांधी से ऊपर बिठाकर राजनीतिक चिकोटी भी काटी है.

इस वक़्त पूर्वोत्तर भारत में गहरा असंतोष है, नागरिकता क़ानून को लेकर भारी हंगामा है और असम में बीजेपी ने जिस तरह अपने साझीदारों के साथ मिलकर पैठ बनाई थी वह ख़तरे में पड़ गई है.

बीजेपी की साझीदार असम गण परिषद ने इसी मुद्दे पर उसका साथ छोड़ दिया, यहां तक कि बीजेपी की असम प्रदेश इकाई में फूट पड़ने की ख़बरें आ रही हैं क्योंकि नागरिकता बिल ने लोगों को दो धड़ों में बांट दिया है.

ऐसा नहीं है कि भूपेन हज़ारिका भारत रत्न सम्मान पाने वाले पहले असमिया हैं, उनसे पहले स्वतंत्रता सेनानी और राज्य के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोर्दोलोइ को यह सम्मान 1999 में मिल चुका है.

जाने-माने संगीतकार, गायक और फ़िल्मकार भूपेन हज़ारिका को पूर्वोत्तर भारत की आवाज़ के रूप में जाना जाता है और असम में उनका बहुत सम्मान रहा है. 2004 में बीजेपी में शामिल हुए हज़ारिका को भारत रत्न देकर बीजेपी ने इसी आग को ठंडा करने की कोशिश की है.

यह पहली बार नहीं है कि बीजेपी सरकार ने किसी कांग्रेसी नेता को भारत रत्न सम्मान दिया हो, इससे पहले नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके पंडित मदन मोहन मालवीय को यह सम्मान दिया था.

पंडित मदन मोहन मालवीय को सर्वोच्च सम्मान देना एक नई परिपाटी की शुरुआत थी जिसका मक़सद हिंदूवादी छवि वाले नेताओं के लिए रास्ता बनाना था. मालवीय कांग्रेस में थे लेकिन वह नेहरूवादी सेक्युलर धारा के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि लाला लाजपत राय की तरह उदार हिंदूवादी रुझान वाले नेता थे, यहां तक कि मालवीय ने 1909 में लाहौर में अखिल भारतीय हिंदू महासभा की बैठक की अध्यक्षता की थी.

Thursday, December 27, 2018

क्या आपके WhatsApp मैसेज कोई और पढ़ रहा है? ऐसे करें चेक

WhatsApp एक ऐसा इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप है जिसके दुनिया भर में 1.5 अरब से भी ज्यादा ऐक्टिव यूजर्स हैं. लोग वॉट्सऐप पर भरोसा करते हैं. क्या वॉट्सऐप हैक हो सकता है? ये सवाल लगभग हर किसी के मन में होता है. कंपनी इसे सिक्योर बनाया है और एंड टू एंड एन्क्रिप्शन दे कर इसके चैट्स को भी सिक्योर किया है. कई लोगों को ऐसा भी लगता है कि वॉट्सऐप हैक हो ही नहीं सकता. लेकिन ऐसा नहीं है और वॉट्सऐप हैक हो सकते हैं. लेकिन ये थोड़ा ट्रिकी है. कई बार आपके वॉट्सऐप के मैसेजेस कोई और पढ़ रहा होता है, लेकिन आपको इस बात की खबर नहीं होती.

मुमकिन है आपके स्मार्टफोन में वॉट्सऐप होगा और इसे आप सबसे ज्यादा यूज करते हैं. इसलिए आपको सेफ और सिक्योर रहने की जरूरत है. आपको इसके लिए क्या करना है और क्या नहीं करना है हम बताते हैं.

आपको ये पता होगा कि एक नंबर से सिर्फ एक ही स्मार्टफोन में वॉट्सऐप चलाया जा सकता है. आप किसी भी हालत में दो फोन में एक वॉट्सऐप नहीं चला सकते हैं. हालांकि आप एक साथ कंप्यूटर और मोबाइल में एक ही वॉट्सऐप चला सकते हैं. वॉट्सऐप वेब के जरिए आप QR कोड स्कैन करके वेब और मोबाइल पर वॉट्सऐप चला सकते हैं. इस तरीके से आपका वॉट्सऐप हैक भी होता है.

वॉट्सऐप हैकिंग कई बार महज चंद सेकंड्स में हो सकती है. आपने कुछ समय के लिए किसी को फोन दिया और वो आपके वॉट्सऐप को एक टूल के जरिए स्कैन करके सारे चैट्स और रियल टाइम मैसेज हैक कर सकता है. इसकी वजह सिर्फ वॉट्सऐप वेब ऑप्शन है.

दूसरा तरीका ये है कि आपका मोबाइल नंबर वॉट्सऐप में रजिस्टर करके उसे ऐक्टिवेट करने के बाद आपकी पूरी चैट हिस्ट्री रिकवर की जा सकती है. इसके लिए कई ट्रिक्स हैं, जैसे वॉट्सऐप के भेजे गए कोड को कस्टमर केयर की तरफ से फ्रॉड कॉल करके कोड मांगा जा सकता है जो कई केस में देखने को भी मिला है. इसके लिए हैकर्स वॉयस मैसेज का भी सहारा लेते हैं. 

यह चेक करने के लिए की आपका वॉट्सऐप कहीं और नहीं चलाया जा रहा है आप वॉट्सऐप की सेटिंग्स में जा सकते हैं. यहां वॉट्सऐप वेब दिखेगा जिसे ओपन कर सकते हैं. अगर कहीं वॉट्सऐप ओपन है तो यहां उसकी जानकारी दिखेगी. यहां से आप Sessions एंड कर सकते हैं.  अगर यां आपको This phone could not be verified लिखा है तो आप यहां कन्फर्म कर सकते हैं. अगर आपको यहां दिखा कि कोई और सेशन चालू है तो उसे तत्काल एंड करें.

वॉट्सऐप के मुताबिक वॉट्सऐप डेटा डिलीट होने में 90 दिन लगते हैं. हालांकि इस दौरान आप इन्हें ऐक्सेस नहीं कर सकते.

सेशन एंड करने के बाद आप सेटिंग्स में जा कर वॉट्सऐप डिलीट कर सकते हैं. 30 दिन तक डीऐक्टिवेट रहने के बाद आपका अकाउंट डिलीट हो जाएगा. फिर से रजिस्टर  करने के लिए फिर से स्टार्ट प्रोसेस फॉलो करना होगा.

कोई दूसरा आपके नंबर से आपका वॉट्सऐप यूज न करे इसके लिए करें ये बदलाव

वॉट्सऐप में प्राइवेसी सेटिंग्स है जिसके लिए आपको पासकोड सेट करना होता है. इसे टू स्टेप ऑथेन्टिकेशन भी कह सकते हैं. इसे ऐक्टिवेट करने के लिए सेटिंग्स मे जा कर अकाउंट पर टैप करें. यहां Enable 2 Step-verification का ऑप्शन मिलेगा. इसे ऐक्टिवेट कर लें. यहां आपको पासकोड सेट करना है, ईमेल आईडी एंटर करना है.

Tuesday, December 18, 2018

मोदी क्यों हारे? ये बताने वाले कथित न्यूयॉर्क टाइम्स के आर्टिकल का सच

सोमवार को जब कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने सूबे की शपथ ली, तब कुछ दक्षिणपंथी रुझान वाले फ़ेसबुक पेज और ग्रुप एक लेख शेयर कर रहे थे.

उनका दावा था कि अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव की विवेचना कर मुख्य कारणों की एक फ़ेहरिस्त तैयार की है कि आख़िर भारतीय जनता पार्टी और मोदी खेमे को इन चुनावों में हार का सामना क्यों करना पड़ा.

शेयर किए जा रहे आर्टिकल के अनुसार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारतीय वोटर्स के पैटर्न को समझाने की कोशिश की है और बताया है कि मौजूदा मोदी सरकार को इन नतीजों से क्या सबक लेने चाहिए.

ये 'आर्टिकल' तस्वीर और टेक्स्ट के तौर पर अंग्रेज़ी समेत हिन्दी में भी पोस्ट किया गया है. साथ ही इसे व्हॉट्सऐप पर भी शेयर किया जा रहा है.

कुछ लोगों ने इस आर्टिकल का लब्बोलुआब लिखा है कि 'भारतीय वोटर बेहद संकीर्ण मानसिकता के हैं जो हमेशा शिक़ायत करते रहते हैं. साथ ही उन्हें अपनी समस्याओं के हल तुरंत चाहिए, वो लंबी योजनाओं में विश्वास नहीं करते.'

इस लेख की सच्चाई
अपनी पड़ताल में हमने पाया कि लेख बताकर शेयर की जा रही ये पोस्ट फ़र्ज़ी है.

फ़ेसबुक सर्च से पता चलता है कि 11 दिसंबर के बाद से इस पोस्ट को न्यूयॉर्क टाइम्स का आर्टिकल बताकर शेयर किया जा रहा है.

लेकिन 'नरेंद्र मोदी' और 'विधानसभा चुनाव 2018' जैसे की-वर्ड्स से सर्च करने पर ये साफ़ हो जाता है कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने ऐसा कोई आर्टिकल नहीं लिखा है जिसमें विधानसभा चुनावों की विवेचना कर भाजपा की हार के कारण बताए गए हों और भारतीय लोगों के लिए ऐसी भाषा में तो कोई लेख अमरीकी साइट पर क़तई नहीं लिखा गया है.

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसका मज़ाक भी बनाया है. लेकिन भाषाई स्टाइल अमरीकी अख़बार की स्टाइल शीट से बिल्कुल मेल नहीं खाता.

दिलचस्प है कि ये कथित लेख भाजपा की हार के लिए जनता को ही दोषी ठहराता है. जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी पाँचों राज्यों में चुनावी जनादेश का आगे बढ़कर स्वीकार किया है.

Thursday, November 22, 2018

प्रेमी को मारकर शव के टुकड़ों से बना दी बिरयानी

मोरक्को की एक महिला पर प्रेमी की हत्या कर उसके शव के टुकड़े-टुकड़े करने और इन्हें पकाकर मज़दूरों को खिलाने का आरोप लगा है.

मामला संयुक्त अरब अमीरात का है. अभियोजकों का कहना है कि महिला मोरक्को की है. पुलिस के मुताबिक महिला ने तीन महीने पहले अपने ब्वॉयफ्रेंड की हत्या कर दी थी, लेकिन ये मामला तब पकड़ में नहीं आया था.

ये मामला तब पकड़ में आया जब महिला के ब्लेंडर के अंदर एक मानव दांत मिला.

अमीरात के सरकारी अख़बार 'द नेशनल रिपोर्ट्स' के मुताबिक महिला ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और कहा है कि उसने गुस्से में आकर ये हत्या की.

महिला की उम्र 30 साल के आस-पास है और अब उस पर हत्या का मुकदमा चलेगा.

गुस्से में हत्या
अख़बार के मुताबिक महिला सात साल तक अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ रिश्ते में थी, लेकिन एक दिन ब्वॉयफ्रेंड ने महिला को बताया कि वो उससे शादी नहीं कर सकता और किसी अन्य महिला से शादी करना चाहता है.

हालाँकि पुलिस ने यह नहीं बताया कि ब्वॉयफ्रेंड की हत्या कैसे हुई. अख़बार के मुताबिक महिला ने ब्वॉयफ्रेंड के शव के टुकड़े-टुकड़े कर चावल के साथ पकाए और पास में काम करने वाले पाकिस्तानी मज़दूरों को खिलाया.

मामले का पता तब चला जब मारे गए व्यक्ति का भाई उसे खोजने के लिए ओमान की सीमा के पास स्थित अल इन शहर आया. वहाँ उसने महिला के ब्लेंडर के अंदर एक मानव दांत पाया.

पुलिस को जानकारी दी गई और फिर बरामद दाँत का डीएनए कराया गया. इससे पता चला कि उस व्यक्ति की हत्या हुई है.

पुलिस के मुताबिक महिला ने मृतक के भाई को बताया था कि उसने उसके भाई (मृतक) को घर से निकाल दिया था. लेकिन पुलिस की कड़ाई से पूछताछ के बाद उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया और माना कि उसने ही ब्वॉयफ्रेंड की हत्या की थी.

महिला ने कथित तौर पर ये भी कहा कि उसने कुछ दोस्तों की मदद से शव के अवशेष हटाए.

Tuesday, November 6, 2018

इमरान ख़ान को चीन ने 'कुछ दिया' या 'सिखाया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का चार दिवसीय चीन दौरा ख़त्म होने जा रहा है.

पाकिस्तान चीन का सदाबहार दोस्त रहा है और पाकिस्तान अभी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. शुक्रवार को चीन दौरे पर इमरान ख़ान ने भी कहा कि पाकिस्तान का आर्थिक संकट बहुत ही गंभीर है.

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में इस साल 42 फ़ीसदी की गिरावट आई है और अब महज 7.8 अरब डॉलर ही बचा है. पाकिस्तान के लिए 7.8 अरब डॉलर की रक़म दो महीने के आयात बिल से भी कम है.

पिछले महीने सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का पैकेज दिया था. इमरान ख़ान ने सऊदी अरब को पहले विदेशी दौरे के लिए चुना था. हालांकि सऊदी के 6 अरब डॉलर की मदद पाकिस्तान को आर्थिक संकट से निकालने के लिए काफ़ी नहीं है.

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ से भी मदद लेने की कोशिश कर रहा है. 1980 के दशक से अब तक पाकिस्तान आईएमएफ़ 12 बार जा चुका है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात के बाद इमरान ख़ान ने कहा कि वो चीन सीखने आए हैं.

इमरान ने कहा, ''मेरी पार्टी दो महीने से सत्ता में है लेकिन दुर्भाग्य से हमें मुल्क की जो अर्थव्यवस्था मिली है वो काफ़ी बदहाल है. हम राजस्व घाटा और चालू खाता घाटा से जूझ रहे हैं.''

शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में इमरान ख़ान काफ़ी अहम हैं. शी ने कहा कि पाकिस्तान सदाबहार दोस्त है.

शी ने कहा, ''मैं पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री के साथ मिलकर काम करने को इच्छुक हूं. दोनों देशो के बीच का संबंध नए युग में प्रवेश कर चुका है. हमलोग आगे भी साथ मिलकर काम करते रहेंगे.''

हालांकि शी जिनपिंग ने किसी भी तरह की आर्थिक मदद की बात नहीं कही. चीन की सरकार के शीर्ष के डिप्लोमेट और चीन के उपविदेश वांग यी ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़रैशी के साथ अलग से बैठक की और कहा कि वो पाकिस्तान को ऐसी हालत में अकेले नहीं छोड़ सकता है.

वांग यी ने कहा, ''चीन पाकिस्तान को मदद देना जारी रखेगा. पाकिस्तान में चीन सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है.''

शनिवार को इमरान ख़ान ने चीन के प्रधानमंत्री ली किक्यिांग से भी मुलाक़ात की. चीन पाकिस्तान में अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट वन रोड के तहत पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट सीपीईसी पर काम कर रहा है.

सीपीईसी की आलोचना पाकिस्तान के भीतर और बाहर भी हो रही है. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान उन देशों की पंक्ति के क़रीब पहुंच गया है जो चीनी क़र्ज़ में फंसे हुए हैं.

इमरान ख़ान के चीन दौरे को लेकर पाकिस्तानी मीडिया में भी काफ़ी हलचल है. पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल पीटीवी ने इमरान के कवरेज से जुड़ी एक ग़लती के लिए माफ़ी मांगी है. पांच नवंबर को इमरान ख़ान चीन में एक समारोह को संबोधित कर रहे थे और इस संबोधन को पाकिस्तान में भी लाइव दिखाया जा रहा था.

संबोधन को दिखाते हुए पीटीवी ने स्क्रीन पर 'बीजिंग' को 'बेगिंग' लिख दिया. बेगिंग मतलब भीख मांगना होता है. पीटीवी पर यह शब्द 20 सेकंड तक रहा. पीटीवी पाकिस्तान का सरकारी न्यूज़ चैनल है. इसके बाद सोशल मीडिया पर यह बात वायरल हो गई. बाद में पीटीवी ने माफ़ी मांगी.

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