Tuesday, July 30, 2019

जबरन मुसलमान बनाने का अधिकार तो पैगंबर को भी नहीं था: इमरान ख़ान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने सोमवार को इस्लामाबाद में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक दिवस पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बंदूक़ की नोंक पर या ज़बरदस्ती शादियां करके किसी को मुसलमान बनाना ग़ैर-इस्लामी है.

इमरान ख़ान ने कहा है कि ये ताक़त तो अल्लाह ने पैगंबर तक को नहीं दी थी कि किसी को ईमान में लाए. प्रधानमंत्री ख़ान ने कहा कि पैगंबर का भी काम केवल पैग़ाम देना था और ईमान तो अल्लाह की नेमत है.

इमरान ख़ान ने कहा कि यह ताक़त जब पैगंबर तक को अल्लाह ने नहीं दी तो हम कौन होते हैं?

इमरान ख़ान ने कहा, ''क़ुरान के अंदर हुक़्म है कि दीन में कुछ भी ज़बरदस्ती नहीं है. कौन क्या ईमान लेकर आता है ये तो अल्लाह की नेमत है. अल्लाह ने तो साफ़ कहा था कि आपका काम पैग़ाम देना है न कि ज़बरदस्ती करना. इंसान किस ईमान में रहेगा यह तो अल्लाह के हाथ में है. बंदूक़ की नोंक पर किसी को आप मुसलमान बनाएं या किसी को मुसलमान नहीं होने के कारण मारें यह पूरी तरह से ग़ैर-इस्लामिक है.''

प्रधानमंत्री ख़ान ने कहा, ''इस्लाम के नाम पर किसी को मारना तो पूरी तरह से ग़ैर-इस्लामी है. आपको बुनियाद याद रखने की ज़रूरत है क्योंकि अल्लाह ने पैगंबर को भी ये अधिकार नहीं दिया था. अल्लाह के पैगंबर के पास ये अधिकार नहीं था तो आप कहां से हासिल कर लेते हैं."

"इस्लाम में दूसरे धर्मों के धर्मस्थलों की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की गई है. उसकी इज़्ज़त है. आज जो ज़बरदस्ती करते हैं और उन्हें लगता है कि इस्लाम का भला कर दिया है लेकिन उन्हें इस्लाम के बारे में पता नहीं है. ऐसे लोग न तो क़ुरान जानते हैं और न ही सुन्नत जानते हैं.''

इमरान ख़ान की इन बातों पर समारोह में मौजूद लोगों ने ख़ूब तालियां मारीं. इमरान ख़ान ने कहा, ''जब हम मदीना की रियासत की बात करते हैं तो आधुनिक रियासत की बात करते हैं. मदीना की रियासत में एक ख़लीफ़ा भी क़ानून के नीचे था. पाकिस्तान इसलिए नहीं बना था कि पहले यहां एलीट हिन्दू थे और उनकी जगह अब एलीट मुसलमानों ने ले ली. मदीना की रियासत में भी अल्पसंख्यकों से भेदभाव नहीं किया जाता था.''

इमरान ख़ान ने कहा, ''मैं नॉर्वे और फ़िनलैंड जैसे देशों की सभ्यता और समाज को देखता हूं तो 1400 साल पहले मदीना की न्यायप्रिय व्यवस्था की याद आती है."

"इस्लाम में दूसरे धर्मों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की बात क़यामत तक कही गई है. यही हमारा आदर्श है. सारा अरब इस्लाम के अंदर आ गया तब भी कोई भेदभाव नहीं किया गया.''

उन्होंने कहा, ''मदीना की रियासत में अल्पसंख्यकों को पूरा हक़ मिला था. उनका स्टेट में हिस्सा था. यह रियासत तालीम और विज्ञान में आगे था. हमारे मुल्क़ में रूल ऑफ लॉ नहीं है. जब क़ानून का राज नहीं होता तो बड़ी क़ौम सबसे पहले तबाह होती है. जो ज़्यादा जुर्म कर रहा है उन्हें विशेषाधिकार मिला हुआ है. सिर्फ़ यहां अल्पसंख्यकों को ही हक़ नहीं मिला है बल्कि ग़रीबों को भी हक़ नहीं मिला है.''

इमरान ख़ान ने कहा, ''हमारी जंग हक़ की है. अल्पसंख्यकों के साथ ग़रीबों के लिए हक़ की जंग लड़नी है. हमें आधुनिक पाकिस्तान बनाना है. इस्लामिक राज्य में भी सभी इंसानों के साथ समान व्यवहार होता है. इस्लाम किसी से भेदभाव की इजाज़त नहीं देता है. क़बायली इलाक़ों के लोग क्यों पाकिस्तान के लिए लड़ेंगे जब उन्हें हक़ ही नहीं मिला है. इसी तरह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हमारी है. हमने प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसमें थोड़ा वक़्त लगेगा. मदीना की रियासत बनने में भी वक़्त लगा था.''

इमरान ख़ान ने कहा, ''अगर हिन्दू, सिख और ईसाई ये कहना शुरू कर देंगे कि ये पाकिस्तान उनका है तो यह मुल्क़ और मज़बूत होगा. मुझे तो अंदाज़ा ही नहीं था कि करतारपुर सिखों के लिए मदीना है. मैंने सोचा कि मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना इतना अहम है तो सिखों के लिए भी तो ऐसा ही है."

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