Tuesday, April 23, 2019

गठबंधन लंबा चलेगा लेकिन दोनों दलों का विलय कभी नहीं होगा: अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव का कहना है कि सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन हमेशा के लिए हुआ है क्योंकि ये गठबंधन विचारों का संगम है.

लेकिन उनका यह भी कहना है कि बावजूद इसके, इन दलों का विलय कभी नहीं होगा. अखिलेश के मुताबिक़, 'ऐसा इसलिए ताकि दलों के बीच संतुलन बना रहे और रफ़्तार तेज़ रहे.'

सैफ़ई में अपने पैतृक आवास पर बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में उन्होंने समाजवादी पार्टी के गढ़ कहे जाने वाले इलाक़ों में अपने सगे चाचा से मिल रही चुनौती को ख़ारिज करते हुए कहा, "गठबंधन की लड़ाई सिर्फ़ बीजेपी से है, बाक़ी दलों को जनता ख़ुद ही ख़ारिज कर देगी. किसी दूसरी पार्टी से हमें कोई चुनौती नहीं मिल रही है."

अखिलेश यादव के चाचा, पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया नाम से नई पार्टी बनाई है और उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में पचास से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

हालांकि पार्टी ने उन सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं खड़े किए हैं जहां यादव परिवार के अहम लोग चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन ख़ुद शिवपाल यादव उस फ़िरोज़ाबाद सीट से चुनाव लड़ रहे हैं जहां से समाजवादी पार्टी के प्रमुख महासचिव प्रोफ़ेसर रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं. अक्षय यादव फ़िरोज़ाबाद सीट पर निवर्तमान सांसद हैं.

अखिलेश यादव ने शनिवार को फ़िरोज़ाबाद में मायावती के साथ संयुक्त रैली भी की थी और एक दिन पहले मैनपुरी की रैली में मायावती ने अखिलेश का परिचय 'मुलायम सिंह यादव के असली उत्तराधिकारी' के रूप में कराया था.

मैनपुरी में गठबंधन की रैली के दौरान मुलायम सिंह यादव और मायावती का एक मंच पर आना लोगों को हैरान करने वाला था क्योंकि दोनों के बीच पिछले 24 साल से राजनीतिक दुश्मनी के साथ-साथ व्यक्तिगत दुश्मनी भी थी.

अखिलेश यादव कहते हैं, "दोनों को एक साथ लाने में मेहनत तो ज़रूर करनी पड़ी लेकिन नेताजी का आशीर्वाद इस गठबंधन के लिए इसलिए भी है क्योंकि वो जानते हैं कि देश में और प्रदेश में इसकी कितनी ज़रूरत है और कैसी सरकार यहां काम कर रही है."

केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना की आलोचना करते हुए अखिलेश यादव कहते हैं, "सरकार के पास अतिरिक्त सिलिंडर पड़े हुए थे. उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर को लाभ पहुंचाना था. उन्हें फ़ायदा पहुंचाने के लिए ये सिलिंडर उन्होंने ग़रीबों को बांट दिए और उसका जमकर प्रचार किया जबकि हक़ीक़त ये है कि जिन ग़रीबों को सिलिंडर बांटा गया वो इतना महंगा सिलिंडर दोबारा भरा तक नहीं पा रहे हैं."

अखिलेश यादव ने दावा किया है, "राज्य की ज़्यादातर सीटों पर गठबंधन की जीत होगी और बीजेपी दस सीटों के भीतर सिमट कर रह जाएगी. पहले दो चरण में जिन सीटों पर चुनाव हुए हैं, वहां तो उसका खाता भी नहीं खुलेगा."

अखिलेश यादव कांग्रेस पर ज़्यादा हमलावर तो नहीं होते लेकिन गठबंधन में न शामिल होने के लिए कांग्रेस पर तंज़ ज़रूर कसते हैं. उनका साफ़ कहना है कि गठबंधन में शामिल न होने का फ़ैसला कांग्रेस का था.

उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी गठबंधन में नहीं आना चाहती थी क्योंकि उसे ज़रूरत भी नहीं थी. वास्तव में वो लोग बीजेपी को रोकना नहीं चाहते बल्कि अपने दल को यूपी में बचाना चाहते हैं इसलिए वो गठबंधन में नहीं आए. यूपी में अपनी पार्टी को ज़िंदा करना चाह रहे हैं, यही उनकी प्राथमिकता है."

क़ानून व्यवस्था पर यूपी सरकार को घेरते हुए अखिलेश यादव कहते हैं, "बीजेपी के सब लोग चौकीदार बन रहे हैं तो हमारे मुख्यमंत्री जी ठोंकीदार बने जा रहे हैं. यूपी देश का एकमात्र राज्य ऐसा होगा जहां जाति देखकर गोली मारी जा रही है, एनकाउंटर हो रहे हैं."

हालांकि बीजेपी के नेता पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार को सबसे ज़्यादा उसकी कथित ख़राब क़ानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं. कुछ दिन पहले बीबीसी से बातचीत में राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी आरोप लगाया था कि पिछली सरकार अपराधियों को संरक्षण देती थी.

इस आरोप का जवाब अखिलेश यादव इस तरह देते हैं, "क़ानून-व्यवस्था का तो जो हाल है, आप ख़ुद ही देख रहे हैं. पुलिस वाले, प्रशासनिक अधिकारी और दूसरे अधिकारी पीट दिए जा रहे हैं. जनप्रतिनिधि आपस में ही एक-दूसरे को मार रहे हैं, जूतों की सलामी दे रहे हैं. मुख्यमंत्री जी के ऊपर कितनी गंभीर धाराएं हैं, उप मुख्यमंत्री जी के ऊपर कैसी धाराएं हैं, राष्ट्रीय अध्यक्ष को देख लीजिए. ये लोग हमें बताएंगे कि हम अपराधियों को प्रश्रय दे रहे हैं. ये तो बीजेपी ही है जो अपराध भी बढ़ा रही है और अपराधियों को भी बढ़ा रही है."

मैनपुरी की रैली में अखिलेश यादव ने कहा था कि देश की जनता प्रधानमंत्री बदलने के लिए इस बार मतदान कर रही है, लेकिन ये पूछे जाने पर कि गठबंधन की ओर से या फिर विपक्ष की ओर से कौन प्रधानमंत्री बनेगा, उनका कहना था, "नई सरकार बनेगी तो नए पीएम भी बन जाएंगे.

इस विषय पर अखिलेश आगे कहते हैं, "बीजेपी नया देश नहीं बना सकती, नई पार्टी, नया प्रधानमंत्री ही नया देश बना सकता है. समय समय पर जब भी नई सरकारें बनी हैं, प्रधानमंत्री अपने आप चुन लिया गया है. ये कोई मुद्दा नहीं है."

लेकिन लोकसभा में पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव तो नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने की शुभकामना दे आए हैं, इस सवाल पर अखिलेश यादव का कहना था, "नेता जी ने सिर्फ़ एक परंपरा या कहिए कि औपचारिकता का पालन किया जो सदन में आख़िरी दिन होता है कि लोग एक-दूसरे को शुभकामना देते हैं जीत कर दोबारा आने के लिए. इससे ये नहीं समझना चाहिए कि वो मोदी जी के समर्थन में आ गए हैं. उन्हें पता है कि इस सरकार ने लोगों का कितना नुक़सान किया है और उससे देश कितना पीछे चला गया है."

केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघर में खड़ा करते हुए अखिलेश यादव कहते हैं, "प्रधानमंत्री नोटबंदी के बारे में कुछ नहीं बताना चाहते, जीएसटी की चर्चा नहीं करना चाहते, अपने पांच साल का ब्योरा देना नहीं चाहते, सिर्फ़ हिन्दू-मुस्लिम की चर्चा छेड़ेंगे, सेना की वीरता का श्रेय ख़ुद लेंगे ताकि लोग बाक़ी सब मुद्दे भूल जाएं."

अखिलेश यादव आज़मगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. साल 2014 में यहां से मुलायम सिंह ने चुनाव जीता था. इस बार भारतीय जनता पार्टी ने आज़मगढ़ सीट से कभी अखिलेश के क़रीबी रहे भोजपुरी फ़िल्मों के अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ को मैदान में उतारा है.

हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि इससे बीजेपी ने एक तरह से अखिलेश यादव को 'वॉकओवर' देने की कोशिश की है, लेकिन अखिलेश यादव कहते हैं वहां तो बीजेपी अपने ही जाल में उलझ गई है क्योंकि उसके पास लड़ाने वाले उम्मीदवार ही नहीं थे इसलिए उन्हें फ़िल्मी दुनिया का रुख़ करना पड़ा.

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